*यह भी एक केमिकल लोचा है कम उम्र में मेटाबॉलिज्म रेट ज्यादा होता है। शरीर आराम में भी अधिक कैलोरी जलाता है.*

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर, मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन,होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि जब तक आपकी आयु 30 से कम है तब तक शरीर आपका कैसा भी खाना झेल लेता है।कैलोरी बर्न करने के लिए रोज एक्सरसाइज करनी चाहिए, लेकिन आजकल डेस्क पर बैठकर काम करने वाली जीवनशैली है. अब आधुनिक सुविधाओं की वजह से लोग कम ही एक्सरसाइ कर पाते हैं।जब आप कम उम्र के होते हैं, तो आपका मेटाबॉलिज्म रेट ज्यादा होता है. इसका मतलब है कि आपका शरीर आराम करते समय भी अधिक कैलोरी जलाता है. ऐसे लोगों का वजन बढ़ता नहीं है. जैसे बीस साल की उम्र में बहुत से लोगों का मेटाबॉलिज्म रेट लगभग 2000 कैलोरी प्रति दिन होता है, लेकिन जैसे-जैसे आप 30 की उम्र को पार करते हैं यह घटकर लगभग 1700 कैलोरी प्रति दिन हो जाता है.।यह बदलाव भले ही छोटा लगे, लेकिन इसका असर बहुत होता है. हर दिन सिर्फ़ 300 कैलोरी कम बर्न होने से 30 सालकी उम्र के बाद धीरे-धीरे वजन बढ़ सकता है, भले ही आप घर का खाना खाते रहें, लेकिन वजन बढ़ेगा ही, अगर वजन बढ़ेगा तो बीमारियों के होने का खतरा भी ज्यादा होता है।30 साल की उम्र के बाद शरीर में मांसपेशियों (Muscle Mass) की प्राकृतिक रूप से कमी होने लगती है और मेटाबॉलिज्म (भोजन पचाने की दर) धीमा हो जाता है। इसके अलावा, उम्र के साथ हार्मोन्स में बदलाव और शारीरिक गतिविधि कम होने से शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता घट जाती है।30 के बाद शरीर में कैलोरी बर्न (कैलोरी की खपत) कम होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:मांसपेशियों का कम होना (Sarcopenia): 30 वर्ष की आयु के बाद, शरीर में हर दशक लगभग 3 से 8 प्रतिशत तक मसल मास कम होने लगता है। मांसपेशियां आराम करते समय भी ज्यादा कैलोरी बर्न करती हैं, इसलिए इनके कम होने से कैलोरी की खपत घट जाती है।धीमा मेटाबॉलिज्म: उम्र बढ़ने के साथ शरीर की ऊर्जा की बुनियादी आवश्यकताएं कम हो जाती हैं। यदि 20 के दशक की तुलना में खान-पान और वर्कआउट में बदलाव न किया जाए, तो वजन तेजी से बढ़ने लगता है।हार्मोनल परिवर्तन: 30 की उम्र के बाद ग्रोथ हार्मोन, टेस्टोस्टेरोन और महिलाओं में एस्ट्रोजन के स्तर में कमी आने लगती है। इसके विपरीत तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन (कॉर्टिसोल) का स्तर बढ़ सकता है, जिससे पेट के आसपास चर्बी आसानी से जमा होती है।
