विटामिन बी3 ग्लूकोमा के खतरे को 65 फीसदी कम करता है डॉ अर्चिता महाजन

*विटामिन बी3 ग्लूकोमा के खतरे को 65 फीसदी कम करता है डॉ अर्चिता महाजन* 

*अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी (AAO) जैसे बड़े संगठनों ने इसे केवल एक सपोर्टिव थेरेपी कहा है:* 

 

 

 

 

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि हाल ही में मेडिकल रिसर्च में यह बात सामने आई है कि विटामिन बी3 (निकोटिनमाइड) ग्लूकोमा (काला मोतिया) के खतरे को लगभग 66% तक कम कर सकता है। JAMA Ophthalmology जर्नल में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों की आंखों का दबाव अधिक था (Ocular Hypertension) और उन्होंने विटामिन बी3 की खुराक ली, उनमें ग्लूकोमा विकसित होने का जोखिम दूसरों की तुलना में दो-तिहाई कम पाया गया।यह खोज आंखों के इलाज में एक बड़ा बदलाव ला सकती है, लेकिन इसे पूरी तरह अपनाने से पहले इसके वैज्ञानिक आधार और सावधानियों को समझना जरूरी है।यह कैसे काम करता है? (वैज्ञानिक कारण)माइटोकॉन्ड्रिया को ऊर्जा: हमारी आंखों के पीछे की तंत्रिका कोशिकाओं (Retinal Ganglion Cells) को काम करने के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होती है।NAD+ की कमी को पूरा करना: बढ़ती उम्र के साथ आंखों में NAD+ नामक एक जरूरी मॉलिक्यूल कम होने लगता है, जिससे नसें कमजोर हो जाती हैं। विटामिन बी3 इस कमी को पूरा कर कोशिकाओं के ‘पावरहाउस’ (माइटोकॉन्ड्रिया) को मजबूत बनाता है और नसों को नष्ट होने से बचाता है।अध्ययन के मुख्य निष्कर्षलगभग 2,900 मरीजों पर औसतन 3.7 वर्षों तक किए गए इस अध्ययन में देखा गया कि:जोखिम में बड़ी कमी: विटामिन बी3 लेने वाले केवल 3.5% लोगों में ग्लूकोमा विकसित हुआ, जबकि इसे न लेने वाले 9% लोग इसका शिकार हुए।इलाज की कम जरूरत: विटामिन लेने वाले मरीजों को आंखों का दबाव कम करने वाले ड्रॉप्स की 43% कम जरूरत पड़ी और लेज़र सर्जरी की नौबत भी 62% कम आई।दृष्टि में सुधार: सेंटर फॉर आई रिसर्च ऑस्ट्रेलिया (CERA) के शुरुआती क्लीनिकल ट्रायल में भी देखा गया कि बी3 की उच्च खुराक से कुछ मरीजों की आंखों की रोशनी की संवेदनशीलता में सुधार हुआ。महत्वपूर्ण सावधानियां (खुद से दवा न लें)हालांकि यह रिसर्च बेहद सकारात्मक है, लेकिन अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी (AAO) जैसे बड़े संगठनों ने मरीजों को कुछ जरूरी हिदायतें दी हैं:यह केवल एक सपोर्टिव थेरेपी है: विटामिन बी3 पारंपरिक इलाज (जैसे आई ड्रॉप्स या सर्जरी) का विकल्प नहीं है, बल्कि उसके साथ ली जाने वाली एक सहायक खुराक है।हाई डोज़ के नुकसान: रिसर्च में विटामिन बी3 का जो रूप (निकोटिनमाइड) इस्तेमाल किया गया है, उसकी खुराक बहुत अधिक (लगभग 3 ग्राम प्रतिदिन) होती है। इतनी बड़ी मात्रा डॉक्टर की देखरेख के बिना लेने से लिवर को नुकसान हो सकता है और अन्य गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।

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