नींद और डायबिटीज का दुष्चक्र तोड़ना होगा। शाम को 6:00 बजे के बाद ब्लू लाइट ना देखें । डॉ अर्चिता महाजन

*नींद और डायबिटीज का दुष्चक्र तोड़ना होगा। शाम को 6:00 बजे के बाद ब्लू लाइट ना देखें । डॉ अर्चिता महाजन*

*समय पर नहीं सोते तो डायबिटीज होगी। और यदि डायबिटीज है तो नींद नहीं आएगी*

 

 

 

 

 

 

 

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर, मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन,होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित और चंडीगढ़ महाजन सभा अध्यक्ष श्री राम मूर्ति महाजन जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि नींद और डायबिटीज का गहरा संबंध है। कम या खराब नींद इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाती है और ब्लड शुगर अनियंत्रित करती है, जबकि मधुमेह के लक्षण (जैसे बार-बार पेशाब आना) नींद में खलल डालते हैं। 7-9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार और ब्लड शुगर के बेहतर प्रबंधन के लिए आवश्यक है।

नींद और डायबिटीज के बीच संबंध:नींद की कमी का प्रभाव: कम सोने (6 घंटे से कम) से तनाव हार्मोन (कोर्टिसोल) बढ़ता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा होता है, जिससे ब्लड शुगर स्तर बढ़ जाता है।डायबिटीज का नींद पर प्रभाव: उच्च ब्लड शुगर के कारण रात में बार-बार पेशाब आना, स्लीप एपनिया (सांस रुकना), और नसों में दर्द (न्यूरोपैथी) के कारण नींद में बाधा आ सकती है।हार्मोनल असंतुलन: खराब नींद भूख बढ़ाने वाले हार्मोन (घ्रेलिन) को बढ़ाती है और भूख कम करने वाले हार्मोन (लेप्टिन) को कम करती है, जिससे वजन बढ़ता है और मधुमेह प्रबंधन कठिन हो जाता है। बेहतर नींद के लिए उपाय (मधुमेह प्रबंधन के लिए):

नियमित दिनचर्या: रोजाना एक ही समय पर सोने और उठने का नियम बनाएं।कैफीन और अल्कोहल से परहेज: रात में कैफीन और शराब का सेवन कम करें।शयनकक्ष का वातावरण: कमरा शांत, अंधेरा और आरामदायक होना चाहिए।

शारीरिक गतिविधि: दिन के समय व्यायाम करने से रात में बेहतर नींद में मदद मिलती है, लेकिन सोने से ठीक पहले भारी व्यायाम से बचें।ब्लड शुगर चेक करें: सोने से पहले ब्लड शुगर स्तर की जांच करें और सुनिश्चित करें कि यह सामान्य सीमा में है।रक्त शर्करा का स्तर अधिक होता है , तो गुर्दे इसकी भरपाई के लिए बार-बार पेशाब करने को प्रेरित करते हैं। रात में बार-बार पेशाब करने से नींद में खलल पड़ता है। उच्च रक्त शर्करा के कारण सिरदर्द, प्यास बढ़ना और थकान भी हो सकती है, जिससे नींद आने में परेशानी हो सकती है।

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