क्यों न लोगों के मुंह के कैंसर का खर्चा फिल्मी कलाकारों की संपत्तियां बेच कर चुकाया जाए डॉ अर्चिता महाजन

सार

कुछ फिल्मी कलाकारों ने तो पैसों के लिए शर्म ही बेच खाई है ऊपर से हमारा कानून अंधा है अमीरों के हक में ही जल्दी से जल्दी झुक जाता है। शब्दों की जादूगरी करके गुटके का प्रचार करना वह भी सिर्फ चंद पैसों के लिए कितने लोगों को मुंह का कैंसर दे गया इनको अंदाजा भी नहीं है। अब यदि कोई और देश होता इन सभी फिल्मी कलाकारों की संपत्तियां बेचकर उन सभी गरीबों के मुंह के कैंसर का इलाज कराया जाता जो इनके कहने पर आकर गुटखा खाना शुरू कर दिए

विस्तार

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि कुछ फिल्मी कलाकारों ने तो पैसों के लिए शर्म ही बेच खाई है ऊपर से हमारा कानून अंधा है अमीरों के हक में ही जल्दी से जल्दी झुक जाता है। शब्दों की जादूगरी करके गुटके का प्रचार करना वह भी सिर्फ चंद पैसों के लिए कितने लोगों को मुंह का कैंसर दे गया इनको अंदाजा भी नहीं है।

*सब कुछ जानते हुए भी शब्दों की जादूगरी करके गुटके का प्रचार करना कितना मानवीय शराब के साथ गुटका खाने से चांसेस और भी बढ़ते हैं

अब यदि कोई और देश होता इन सभी फिल्मी कलाकारों की संपत्तियां बेचकर उन सभी गरीबों के मुंह के कैंसर का इलाज कराया जाता जो इनके कहने पर आकर गुटखा खाना शुरू कर दिए क्योंकि वह इनको रोल मॉडल मानते हैं और उनकी हर के ही बात को अपने दिल पर लगा लेते हैं हमारे देश के लोग बहुत सेंसिटिव है उन्हें फिल्मी कलाकारों और रोल मॉडल के बीच का फर्क महसूस ही नहीं होता। मैं किसी एक फिल्मी कलाकार का नाम नहीं लूंगी लगभग सभी इस हमाम में नंगे हैं। इन सबको यह अंदाजा ही नहीं है कि इनका एक दो रुपए वाला गुटखा खाकर,मुंह के कैंसर की बीमारी का इलाज कराने योग्य इनके पास पैसे नहीं होते। जो थोड़ी बहुत बचत होती है वह शुरू के इलाज में ही लग जाती है बाद में सारा परिवार उसका दंड भूगतता है।भारत में गुटके के कारण मुंह के कैंसर (Oral Cancer) के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिसके पीछे मुख्य कारण गुटके में मौजूद घातक रसायन, इसकी आसानी से उपलब्धता और इसके सेवन की गलत आदतें हैं।भारत में गुटके से मुंह के कैंसर बढ़ने के प्रमुख कारण:घातक रसायनों का मिश्रण: गुटखा तंबाकू, सुपारी (Areca nut), और बुझे हुए चूने (slaked lime) का एक अत्यंत विषैला मिश्रण है। चूना मुंह के कोमल ऊतकों को छील देता है, जिससे तंबाकू के कार्सिनोजेन्स (कैंसर पैदा करने वाले तत्व) सीधे खून में मिल जाते हैं।लंबे समय तक मुंह में रखना: उपभोक्ता अक्सर गुटके को गाल और होंठ के बीच लंबे समय तक दबाकर रखते हैं। इससे मुंह के ऊतकों को लगातार नुकसान पहुंचता है और ‘ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस’ (OSMF) जैसी खतरनाक स्थिति बन जाती है, जो कैंसर की पहली सीढ़ी है।सुपारी का कैंसरकारी होना: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा सुपारी को सीधे तौर पर कैंसर पैदा करने वाले पदार्थों (Group 1 Carcinogen) की श्रेणी में रखा गया है।सस्ता और आसान मिलना: गुटखा बहुत सस्ता और आसानी से मिलने वाला उत्पाद है। इसके कारण युवा और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग इसके बहुत जल्दी आदी हो रहे हैं।भ्रामक प्रचार: तंबाकू कंपनियों द्वारा गुटके को सिगरेट का एक “सुरक्षित विकल्प” बताकर प्रचारित किया जाता है, जबकि धुआंरहित तंबाकू फेफड़ों के साथ-साथ पूरे पाचन तंत्र और मुंह के लिए उतना ही (या उससे भी अधिक) खतरनाक है।

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