*आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज सभी आलसियों को करनी चाहिए। टीवी देखते समय आराम से करें डॉ अर्चिता महाजन*
.*फिट रहने के लिए इतनी मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है.*

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज जिसमें आपको अपने शरीर को एक ख़ास पोजीशन में स्थिर रखना होता है.यह व्यायाम विशेष रूप से उन लोगों के लिए बहुत अच्छे हैं जो कम समय में पूरी ताकत बढ़ाना चाहते हैं या जिनके जोड़ों में दर्द की समस्या है।ये आपके शरीर को मजबूत बनाने और ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद कर सकता है. इसके लिए आपको केवल 14 मिनट का एक सेशन करना होता है, वह भी सप्ताह में तीन दिन बस. और आपको जल्द ही इसके फ़ायदे नजर आएंगे.आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज (Isometric Exercises) ऐसे व्यायाम हैं जिनमें बिना कोई हलचल किए एक ही मुद्रा (position) को कुछ समय तक बनाए रखा जाता है, जिससे मांसपेशियां संकुचित होकर मजबूत बनती हैं। यह जोड़ों पर कम दबाव डालते हैं, ताकत बढ़ाते हैं और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज की प्रमुख बातें:
कैसे काम करती हैं: इनमें मांसपेशियों की लंबाई स्थिर रहती है (लंबाई में बदलाव नहीं आता), लेकिन वे तनाव में रहती हैं।उदाहरण: प्लेंक (Plank), वॉल सिट (Wall Sit), साइड प्लेंक (Side Plank), लो स्क्वाट (Low Squat), ग्लूट ब्रिज (Glute Bridge), और ओवरहेड होल्ड (Overhead Hold)।प्रमुख आइसोमेट्रिक व्यायाम (Examples):
प्लेंक (Plank): शरीर को सीधा रखते हुए कोहनी के बल वजन उठाना।
वॉल सिट (Wall Sit): दीवार के सहारे बैठकर कुर्सी जैसी स्थिति बनाना।
साइड प्लेंक (Side Plank): एक तरफ करवट लेकर शरीर को उठाना।
ग्लूट ब्रिज (Glute Bridge): पीठ के बल लेटकर कूल्हों को ऊपर उठाना और रोकना।
होल्डिंग स्क्वाट (Holding Squat): स्क्वाट स्थिति में रुकना।
फायदे: यह जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं, पुनर्वास (rehabilitation) में सहायक हैं, और 14-15 मिनट की दैनिक प्रैक्टिस से अच्छी ताकत हासिल की जा सकती है।
सावधानी: इन्हें करते समय सांस न रोकें। यदि आपको हृदय संबंधी कोई समस्या है, तो पहले डॉक्टर से सलाह लें। कुछ लोकप्रिय आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज:प्लेंक होल्ड: कोहनियों के बल शरीर को सीधा रखकर होल्ड करना।वॉल सिट: दीवार के सहारे बैठकर कुर्सी जैसी स्थिति में रुकना।
होल्डिंग स्क्वाट: आधी स्क्वाट स्थिति में कुछ सेकंड तक बने रहना।आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज के फायदे
रक्तचाप (Blood Pressure) में कमी: शोध बताते हैं कि यह हाई ब्लड प्रेशर को कम करने के लिए सबसे प्रभावी व्यायामों में से एक है।
जोड़ों के लिए सुरक्षित: इसमें जोड़ों का मूवमेंट नहीं होता, इसलिए यह चोट से उबर रहे लोगों (rehabilitation) या अर्थराइटिस के मरीजों के लिए उपयोगी है।
समय की बचत: इन्हें कहीं भी, कभी भी और बिना किसी उपकरण (equipment) के किया जा सकता है।
मांसपेशियों की स्थिरता: यह शरीर के संतुलन और मांसपेशियों की सहनशक्ति (endurance) को बढ़ाता है。 सावधानियां
सांस न रोकें: आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज करते समय अक्सर लोग सांस रोक लेते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है। व्यायाम के दौरान सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
चिकित्सकीय सलाह: यदि आपको हृदय रोग या बहुत अधिक उच्च रक्तचाप है, तो इन्हें शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
