
*जो आम जापान और नेपाल के खाने के योग्य नहीं है वह भारत के लोग क्यों खाएं डॉ अर्चिता महाजन*
*सरकार द्वारा कोई मानक ना होने के कारण, और उत्पादन बढ़ाने के चक्कर में सब कुछ गंवा दिया*
11 जून/ रोज़ाना रिपोर्टर
डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि पिछले दिनों जापान ने हमारे यहां वापस कर दिए फिर नेपाल ने भी वापस कर दिए ऐसा क्या हुआ कि भारत के आमों को इस प्रकार रिजेक्ट किया जा रहा है। एक्सपोर्ट करने से पहले क्यों नहीं इनको विदेशी मनको के अनुसार चेक किया गया। कम से कम बदनामी से तो बचते। अब अलग से मन में डर बैठ गया है कहीं हम जहर तो नहीं खा रहे।जापान ने भारत से आमों के आयात पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया है और पहले आई खेपों को वापस भेजा है। इसका मुख्य कारण भारत के ट्रीटमेंट सेंटर्स में कीड़ों, खास तौर पर फ्रूट फ्लाई (Fruit Fly) और कीटनाशकों का मिलना है। जापान कृषि कीटों को लेकर ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति अपनाता है।जापान ताजे फलों के आयात के लिए बेहद सख्त सेनिटरी-फाइटोसैनिटरी नियम (SPS) लागू करता है। जापानी अधिकारियों द्वारा जांच के दौरान भारतीय सुविधाओं में खामियां पाई गई थीं, जिसके बाद अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बैंगनपल्ली जैसी आम की किस्मों का निर्यात प्रभावित हुआ है।नेपाल ने भारतीय आमों के आयात पर कीटनाशकों (Pesticides) की मात्रा अधिक होने के कारण अस्थायी रोक लगाई थी, जिसे जांच और सुरक्षा मानकों की पुष्टि के बाद वापस ले लिया गया।व्यापार और सीमा विवाद का हालिया संदर्भ:कड़े सुरक्षा मानक: नेपाल ने आम और केले जैसे फलों में कीटनाशकों की जांच सख्त कर दी थी, जिसके बाद स्वास्थ्य चिंताओं का हवाला देते हुए आयात को नियंत्रित किया गया।भारत सरकार स्थिति को सुधारने के लिए वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) और सुविधाओं को उन्नत करने पर काम कर रही है, ताकि जापानी मानकों को पूरा करके निर्यात दोबारा शुरू किया जा सके।क्या आप जानना चाहते हैं कि इस बैन का भारतीय आम उत्पादकों पर क्या असर पड़ेगा या भारत इस मुद्दे को कैसे सुलझा रहा है?
