प्रेगनेंसी में किडनी का कैसे रखें ख्याल डॉ अर्चिता महाजन सीनियर डाइटिशियन शाह हॉस्पिटल कैथल*

*प्रेगनेंसी में किडनी का कैसे रखें ख्याल डॉ अर्चिता महाजन सीनियर डाइटिशियन शाह हॉस्पिटल कैथल*

*हाई बीपी मोटापा डायबिटीज और अधिक आयु में प्रेगनेंसी प्लेन करना किडनी के लिए घातक है* 

 

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि किडनी को मां और गर्भ और पल रहे बच्चे,दोनों के लिए अधिक खून फिल्टर करना होता है. हालांकि अधिकतर महिलाओं की प्रेग्नेंसी स्वस्थ रहती है, लेकिन डॉक्टर इस दौरान किडनी के फंक्शन में गड़बड़ी (रीनल डिसफ़ंक्शन) के मामलों में बढ़ोतरी देख रहे हैं. अगर समय रहते इसका पता ना चले और इलाज ना हो, तो यह महिला और बच्चे की सेहत के लिए गंभीर जोखिम हो सकता है।रक्त का बढ़ता भार: गर्भावस्था के दौरान शरीर में रक्त और तरल पदार्थ का स्तर 40-50% तक बढ़ जाता है, जिससे किडनी को सामान्य से बहुत अधिक खून फिल्टर करना पड़ता है।गर्भाशय का दबाव: जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है, गर्भाशय किडनी से मूत्राशय तक पेशाब पहुँचाने वाली नली (यूरेटर) पर दबाव डालता है, जिससे पेशाब का बहाव धीमा हो जाता है और इन्फेक्शन का खतरा बढ़ता है।प्रीक्लेम्पसिया (हाई ब्लड प्रेशर): प्रेगनेंसी के दूसरे हाफ में उच्च रक्तचाप और पेशाब में प्रोटीन आने की समस्या (प्रीक्लेम्पसिया) विकसित होने से सीधे किडनी पर गंभीर असर पड़ता है।पुराने रोग: यदि महिला को पहले से ही क्रोनिक किडनी रोग, अनियंत्रित शुगर (मधुमेह), या हाई ब्लड प्रेशर हो, तो जोखिम कई गुना अधिक हो जाता है।खतरे के चेतावनी संकेतचेहरे, हाथों और पैरों में अचानक बहुत ज्यादा सूजन आना।पेशाब में जलन, खून आना, झागदार पेशाब, या पेशाब की मात्रा बहुत कम हो जाना।लगातार तेज सिरदर्द, आँखों के आगे धुंधलापन दिखना या सांस फूलना।पीठ के निचले हिस्से या कमर में तेज दर्द रहना।

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