*बच्चा शरारती भी है और फोकस करने में कठिनाई है तो उसे मॉनिटर करें डॉ अर्चिता महाजन*
*समय रहते पता चल जाए और इलाज हो जाए तो बच्चे का भविष्य खराब नहीं होता*

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन,होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित और चंडीगढ़ महाजन सभा अध्यक्ष श्री राम मूर्ति महाजन जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि कई बार बच्चे बहुत ज्यादा चंचल होते हैं या किसी चीज पर ध्यान नहीं लगा पाते हैं। माता-पिता अक्सर इसे बच्चे की सामान्य शरारत मानकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि यह ‘एडीएचडी’ जैसी समस्या के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है।ADHD (अटेंशन-डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) से ग्रस्त बच्चे सामान्य शरारती बच्चों से भिन्न होते हैं; उनमें अत्यधिक सक्रियता, एकाग्रता की कमी, और आवेगशीलता (बिना सोचे कार्य करना) जैसे लक्षण लगातार और हर जगह (घर/स्कूल) दिखते हैं। यह व्यवहार जानबूझकर नहीं, बल्कि मस्तिष्क के विकास में भिन्नता के कारण होता है, जिसके लिए विशेषज्ञ से परामर्श, व्यवहार चिकित्सा और कभी-कभी दवा की आवश्यकता होती है। ADHD और सामान्य शरारत में अंतर (कैसे पहचानें):स्थिरता की कमी: ADHD बच्चे एक जगह बैठने में असमर्थ होते हैं, वे लगातार चलते-फिरते या छटपटाते रहते हैं।अत्यधिक आवेग (Impulsivity): बिना सोचे-समझे व्यवहार करना, दूसरों की बात काटना, अपनी बारी का इंतजार न करना।ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता: जल्दी बोर होना, निर्देश न सुनना, और स्कूल/खेल में ध्यान न लगा पाना।व्यवहार की अवधि: यह व्यवहार 12 साल की उम्र से पहले शुरू होता है और समय के साथ सुधरने के बजाय बना रहता है। ADHD के लक्षण और प्रबंधन (Parents/Teachers):
व्यवहार चिकित्सा (Behavior Therapy): बच्चे को अपनी भावनाओं और व्यवहार पर नियंत्रण पाने में मदद करें।निश्चित दिनचर्या (Routine): घर और स्कूल में नियमों को सुसंगत और स्पष्ट रखें, जिससे भ्रम न हो।सकारात्मक प्रोत्साहन: अच्छे व्यवहार की प्रशंसा करें और छोटे-छोटे लक्ष्यों को पूरा करने पर प्रोत्साहित करें।शारीरिक गतिविधि: व्यायाम (एक्सरसाइज) बच्चों में डोपामाइन और सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाकर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।चिकित्सकीय सलाह: यदि व्यवहार पढ़ाई या सामाजिक जीवन में बाधा डाल रहा है, तो बाल रोग विशेषज्ञ या मनोरोग विशेषज्ञ से जांच करवाएं।
