*आज भी अंधविश्वास कायम है कि चिकनपॉक्स या खसरा होने पर डॉक्टर से इलाज नहीं कराना चाहिए। डॉ अर्चिता महाजन*

*यह अंधविश्वास बच्चे के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।*
डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और चंडीगढ़ महाजन सभा अध्यक्ष श्री राम मूर्ति महाजन जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि हमारे समाज में आज भी यह पुरानी सोच कायम है कि चिकनपॉक्स या खसरा होने पर डॉक्टर से इलाज नहीं कराना चाहिए। यह अंधविश्वास बच्चे के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।चिकनपॉक्स और खसरा वायरल बीमारियाँ हैं, जिन्हें केवल ‘माता’ मानकर छोड़ना या झाड़-फूँक करना बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है। यह अंधविश्वास गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। डॉक्टर से तुरंत परामर्श लेना, बुखार कम करना और संक्रमण को फैलने से रोकना ही सही इलाज है, अन्यथा निमोनिया या मस्तिष्क ज्वर का खतरा बढ़ सकता है। अंधविश्वास और उससे जुड़े खतरे:गलत धारणा: चिकनपॉक्स (छोटी माता) या खसरे को देवी का प्रकोप मानकर उपचार न कराना या नहाने से मना करना।स्वास्थ्य जोखिम: इलाज न कराने पर निमोनिया, निर्जलीकरण (dehydration), त्वचा का गंभीर संक्रमण, या दिमागी बुखार (Encephalitis) जैसी खतरनाक स्थितियाँ पैदा हो सकती हैं।
संक्रमण फैलना: ये बीमारियाँ अत्यधिक संक्रामक होती हैं; यदि संक्रमित बच्चे को अलग नहीं रखा गया, तो यह दूसरों में फैल सकती है।
डॉक्टरी सलाह का महत्व (क्या करें):
तुरंत डॉक्टर को दिखाएं: लक्षणों (जैसे बुखार, दाने) के दिखते ही बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें।
सही उपचार: एंटीवायरल दवाएं और अन्य इलाज से बच्चे को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है।
स्वच्छता: बच्चे को नहलाना या साफ़ रखना ज़रूरी है, जिससे दानों में इन्फेक्शन न हो (डॉक्टर की सलाह पर)।टीकाकरण: चिकनपॉक्स से बचाव के लिए टीका (Vaccine) उपलब्ध है, जो बच्चों के लिए बहुत सुरक्षित और प्रभावी है।
