आखिर क्यों जंडूसिंघा में बनी अवैध बिल्डिंग का निर्माण नहीं रोक पाया: (जे,डी,ए) नीचे से लेकर ऊपर तक आ रही रिश्वतखोरी की बू

जालंधर/ सुनील कुमार

किसके इशारे पर बन गई अवैध बिल्डिंग,( जे,डी,ए) एक जांच का विषय, जल्द ही सामने आएंगे कई चेहरे

सार

जंडूसिंघा क्षेत्र में कथित अवैध व्यावसायिक निर्माण को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। सूत्रों के अनुसार इस निर्माण की शिकायत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तथा संबंधित विभाग के इंस्पेक्टर अमनदीप सिंह को काफी समय पहले दी गई थी, लेकिन शिकायत के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुका और अब मौके पर दो मंजिला इमारत खड़ी हो चुकी है।

विस्तार

जंडूसिंघा क्षेत्र में कथित अवैध व्यावसायिक निर्माण को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। सूत्रों के अनुसार इस निर्माण की शिकायत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तथा संबंधित विभाग के इंस्पेक्टर अमनदीप सिंह को काफी समय पहले दी गई थी, लेकिन शिकायत के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुका और अब मौके पर दो मंजिला इमारत खड़ी हो चुकी है।सवाल यह उठ रहा है कि यदि शिकायत समय रहते विभाग तक पहुंच गई थी तो फिर निर्माण कार्य को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इस संबंध में इंस्पेक्टर अमनदीप सिंह से बात की तो उनका कहना था कि उन्होंने कई बार निर्माणकर्ताओं को काम बंद करने के लिए कहा था, लेकिन उनके कहने के बावजूद काम नहीं रुका और राजस्व अधिकारी को शिकायत भेज दी है वो कुछ नहीं कर रहे ऐसा कहते रहे एक सरकार अधिकारी अपने इलाके में अवैध निर्माण रोक नहीं पा रहा है तो ( किसी शायर ने कहा, कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं हैकुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते) | यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या केवल मौखिक अनुरोध करना ही विभागीय कार्रवाई माना जाएगा या फिर नियमों के तहत कोई सख्त कदम भी उठाया जाना चाहिए था?

शिकायत करने के बाद तेज़ी से अवैध निर्माण कैसे हो गया !

मामले ने अब कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर इसके पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण काम कर रहा है? इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच विजिलेंस विभाग द्वारा करवाई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।सबकी निगाहें अब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर टिकी हैं। देखना होगा कि सरकार इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।फिलहाल जंडूसिंघा का यह निर्माण प्रशासनिक जवाबदेही और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के दावों को कठघरे में खड़ा करता नजर आ रहा है।

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