आई-बैग क्या है ? उनसे कैसे छुटकारा पाया जाए? डॉ अर्चिता महाजन* 

*आई-बैग क्या है ? उनसे कैसे छुटकारा पाया जाए? डॉ अर्चिता महाजन*

16 मई/ रोज़ाना रिपोर्टर

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर, मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन,होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया किआंखों के चारों ओर सूजन मुख्य रूप से वृद्धावस्था कारक से जुड़ी होती है । एक बार जब आपकी त्वचा में बुढ़ापे के लक्षण दिखाने लगती है, तो आपकी आंखें लचीलापन खो देती है, और इस तरह sagging पलकें, झुर्रियां, काले घेरे या सिलवटों का गठन होता है। ये आई बैग आंखों के नीचे कलि छाया भी पैदा करते हैं, जिन्हें डार्क सर्कल्स के नाम से जाना जाता है।क्या हैं आई बैग के कारण :

आई बैग के बनने का पता लगाने के लिए कई तरीके है । जिनमे से निचे कुछ प्रमुख कारण दिए है,

नींद की कमी

बहुत अधिक रोना

एलर्जी प्रतिक्रियाओं

बुढ़ापा

परिरक्षक खाद्य पदार्थों

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों अत्याधिक उपयोग

पर्यावरण प्रदूषण

अत्याधिक शराब पीना या धूम्रपान

हार्मोनल असंतुलन

तनाव

पोषण की कमी

किडनी के आईबैग हरे रंग के चोट के निशान की तरह दिखाई देते हैं जैसे कि किसी ने आपकी आंख को एक पंच दिया (काली आंख की तरह) हो ।ऊपरी और निचली पलकें स्लीपिंग से संबंधित हैं । स्लीपिंग के आईबैग सूजे हुए और चमकदार दिखाई देते हैं । जब आप स्लीपिंग आईबैग का पहचान करते हैं, तो आपको डायरिया, अनिद्रा, ऊर्जा की कमी और स्मृति हानि जैसे अन्य दूसरो लक्षणों पर भी ध्यान देना चाहिए । इसलिए, जब आप आईबैग में सूजन के साथ ऐसे लक्षणों का अनुभव करते हैं, तो आपको अपनी निद्रा का अत्यंत ध्यान रखना चाहिए ।आमतौर पर अधिक रोने या सूजन के कारण होते हैं। इन आईबैग की उपस्थिति आमतौर पर सूजन होती है। आप इसकी पहचान आंखों के चारों ओर की त्वचा में कड़ापन और सूजी हुयी पलकों से कर सकते है ।इस प्रकार की अस्थायी आईबैग्सकुछ घंटों के बाद स्वयं ही गायब हो जाती है ।ठंडी सिकाई: ठंडे पानी में भीगा हुआ कपड़ा, ठंडी चम्मच, या फ्रिज में रखे हुए ग्रीन टी-बैग्स को बंद आंखों पर रखें।

कम नमक खाएं: अपने भोजन में सोडियम की मात्रा कम करें ताकि शरीर में पानी न रुके।

भरपूर नींद: रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें और सोते समय सिर को एक अतिरिक्त तकिये पर थोड़ा ऊंचा रखें।

हाइड्रेशन: दिन भर में पर्याप्त पानी पिएं ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे

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