*चिप्स खाने वाले बच्चे पढ़ाई में अच्छा नहीं कर पाते डॉ अर्चिता महाजन*
*शाइनिंग बच्चे चाहते हो तो उनको चिप्स पैक्ड फूड और प्रोसेस्ड फूड से दूर रखो*

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि आजकल पैकेट वाले स्नैक्स हमारी आदत बन चुके हैं. ऑफिस में भूख लगी तो चिप्स, चाय के साथ बिस्किट, या जल्दी में इंस्टेंट नूडल्स, ये सब अब आम बात है. न सिर्फ बड़े बल्कि बच्चे भी इनके आदि हो रहे हैं. कई लोगों को लगता है कि कभी-कभार ऐसे स्नैक्स खाने से कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन नई रिसर्च कुछ और ही कहानी बता रही है. हाल ही में सामने आई एक स्टडी के मुताबिक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स, जैसे चिप्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स और पैकेट वाले स्नैक्स, दिमाग की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं. रिसर्च में पाया गया कि रोजाना ज्यादा मात्रा में ऐसे फूड्स खाने से याददाश्त कमजोर होने, ध्यान कम होने और यहां तक कि डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ सकता है. यानी आपकी छोटी-छोटी खाने की आदतें भविष्य में दिमाग की सेहत तय कर सकती हैं.लगातार और अधिक मात्रा में चिप्स (अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड) खाने से बच्चों के मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ सकता है, जिससे उनकी याददाश्त कमजोर, ध्यान केंद्रित करने में कमी और सोचने की क्षमता धीमी हो सकती है। इनमें मौजूद उच्च सोडियम, प्रिजर्वेटिव्स और हानिकारक केमिकल (जैसे एक्रीलामाइड) दिमाग के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाते हैं।
चिप्स का बच्चों के दिमाग पर असर:
याददाश्त और एकाग्रता में कमी: चिप्स जैसे प्रोसेस्ड फूड्स से याददाश्त कम हो सकती है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
न्यूरोटॉक्सिन का खतरा: अत्यधिक तले हुए चिप्स में ‘एक्रीलामाइड’ नामक हानिकारक केमिकल (न्यूरोटॉक्सिन) हो सकता है, जो सीधे दिमाग के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
मानसिक विकास में बाधा: एक अध्ययन के अनुसार, 2 साल की उम्र से ही प्रोसेस्ड फूड ज्यादा खाने वाले बच्चों का IQ लेवल (बौद्धिक क्षमता) बाद में कम पाया गया।
मस्तिष्क संरचना में बदलाव: अस्वस्थ आहार से दिमाग के उस हिस्से (हिप्पोकैम्पस) के आकार में कमी आ सकती है, जो याददाश्त और भावनाओं के लिए जिम्मेदार होता है।
अन्य स्वास्थ्य जोखिम:
मोटापा और सुस्ती: चिप्स में पोषक तत्वों की कमी होती है, जो बच्चों में सुस्ती और मोटापे का कारण बनते हैं।
उच्च सोडियम: चिप्स में सोडियम (नमक) की बहुत अधिक मात्रा होती है, जो किडनी के लिए हानिकारक है और बच्चों में हाइपरटेंशन (बीपी) की समस्या पैदा कर सकती है।
