*नागरमोथा (मुस्ता) एक अत्यंत गुणकारी औषधीय पौधा है, डॉ अर्चिता महाजन*

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि नागरमोथा (मुस्ता) एक अत्यंत गुणकारी औषधीय पौधा है, जिसे अक्सर लोग साधारण खरपतवार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यह खेतों, बगीचों और खाली पड़ी ज़मीन पर अपने-आप उग जाता है, इसलिए अधिकतर लोग इसे बेकार मानकर उखाड़ फेंक देते हैं। लेकिन वास्तव में इसकी जड़ों में औषधीय गुणों का अनमोल खज़ाना छिपा होता है। नागरमोथा (Cyperus rotundus), जिसे मुस्ता या नट ग्रास भी कहा जाता है, एक औषधीय खरपतवार है। इसकी जड़ों (कंद) में पाचन, सूजन कम करने (Anti-inflammatory), त्वचा की देखभाल और वजन घटाने (Anti-obesity) के गुण होते हैं। यह आयुर्वेद में भूख बढ़ाने, दस्त रोकने और पेट दर्द के इलाज में प्रमुखता से इस्तेमाल होता है। नागरमोथा के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ और उपयोग:पाचन में सुधार: यह पाचन शक्ति बढ़ाता है, पेट दर्द, ऐंठन और दस्त की समस्याओं में राहत देता है।वजन नियंत्रण: इसमें मौजूद एंटी-ओबेसिटी गुण शरीर की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद करते हैं।
त्वचा स्वास्थ्य: इसके एंटी-बैक्टीरियल और सुगंधित गुण त्वचा के संक्रमण, मुंहासे और खुजली को कम करने में मदद करते हैं।बुखार और दर्द: यह बुखार को कम करने और मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द से राहत दिलाने में सहायक है।औषधीय प्रयोग: इसके कंद का पाउडर या काढ़ा शहद/गुनगुने पानी के साथ लिया जाता है। आयुर्वेद में नागरमोथा का उपयोग हजारों वर्षों से किया जा रहा है। इसकी जड़ें पाचन तंत्र को मजबूत करने, गैस, अपच और दस्त जैसी समस्याओं में बहुत लाभकारी मानी जाती हैं।किसी भी जड़ी-बूटी का नियमित सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है, खासकर यदि आप गर्भवती हैं या किसी विशेष दवा का सेवन कर रहे हैं।
✅️ नागरमोथा के अद्भुत औषधीय फायदे जानिए —
1️⃣ पाचन तंत्र के लिए वरदान :-पाचन के लिए नागरमोथा अत्यंत लाभकारी है। इसमें भूख बढ़ाने और पाचन सुधारने वाले गुण पाए जाते हैं। यह मंदाग्नि यानी कम भूख लगने की समस्या को दूर करता है, दस्त और पेट की मरोड़ में राहत देता है और पेट के हानिकारक कीड़ों को खत्म करने में मदद करता है। पाचन समस्याओं में इसे शहद या गुनगुने पानी के साथ लेना सबसे सरल और असरदार तरीका है।
2️⃣ महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याओं में मददगार :-
महिलाओं के स्वास्थ्य में भी इसका विशेष महत्व है। मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द को कम करने में यह सहायक है और अनियमित पीरियड्स को संतुलित करने में मदद करता है।3️⃣ त्वचा और सौंदर्य के लिए लाभकारी :-
त्वचा और सौंदर्य के लिए भी नागरमोथा काफी लाभकारी है। इसकी खुशबू और एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा को साफ और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। मुँहासे और दाग-धब्बे कम करने के लिए इसका लेप लगाया जा सकता है, जबकि खुजली और त्वचा संक्रमण होने पर इसके काढ़े से प्रभावित हिस्से को धोना लाभकारी होता है।4️⃣ बुखार कम करने में सहायक :-
इसके अलावा, नागरमोथा बुखार को कम करने में भी प्रभावी माना जाता है। पुराने या बार-बार आने वाले बुखार में इसका काढ़ा शरीर के तापमान को सामान्य करने और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।5️⃣ वजन घटाने में सहायक :-वजन नियंत्रण में भी नागरमोथा उपयोगी है। इसमें एंटी-ओबेसिटी गुण होते हैं जो शरीर में जमा हुए अतिरिक्त फैट को कम करने में मदद करते हैं।
✅️ नागरमोथा का कौन सा भाग इस्तेमाल किया जाता है?
नागरमोथा में औषधीय गुण मुख्य रूप से इसकी जड़ और उससे बनने वाले छोटे गांठ वाले ट्यूबर (tubers) में पाए जाते हैं। इसे आयुर्वेद में सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है।
■ जड़ और ट्यूबर :- सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला भाग है। इन्हें सुखाकर या ताजा रूप में चूर्ण, काढ़ा, तेल या लेप बनाने में उपयोग किया जाता है।■ पत्तियां और तना :- इनका औषधीय उपयोग कम होता है और मुख्यतः जड़ की तुलना में विशेष असर नहीं होता है।
✅️ नागरमोथा का उपयोग कैसे करें —1) नागरमोथा चूर्ण (Powder) :-नागरमोथा की सूखी जड़ों को पीसकर बनाया गया चूर्ण 1–3 ग्राम की मात्रा में शहद या गुनगुने पानी के साथ दिन में एक या दो बार लिया जा सकता है। यह गैस, अपच, पेट दर्द, दस्त और भूख न लगने जैसी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है तथा पाचन शक्ति को मजबूत करने में सहायक होता है।2) नागरमोथा का काढ़ा (Decoction) :-काढ़ा बनाने के लिए लगभग एक छोटा चम्मच (लगभग 5 ग्राम) नागरमोथा चूर्ण को एक कप पानी में डालकर धीमी आंच पर उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो उसे छानकर 10–20 मिली० की मात्रा में दिन में दो बार सेवन किया जा सकता है। यह बुखार, पाचन संबंधी विकारों और आंतों की कमजोरी में उपयोगी माना जाता है।
3) नागरमोथा का लेप (Paste) :-त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए नागरमोथा का लेप भी उपयोग किया जाता है। इसके चूर्ण में पानी या गुलाब जल मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें और प्रभावित स्थान पर 20–30 मिनट तक लगाकर रखें, फिर साफ पानी से धो लें। यह खुजली, फंगल संक्रमण, हल्की सूजन और त्वचा की जलन में सहायक माना जाता है।
