ब्रश करने के बावजूद क्यों करें गिलोय की दातुन डॉ अर्चिता महाजन* 

*ब्रश करने के बावजूद क्यों करें गिलोय की दातुन डॉ अर्चिता महाजन*

 

15 अप्रैल/ रोज़ाना रिपोर्टर

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित और चंडीगढ़ महाजन सभा अध्यक्ष श्री राम मूर्ति महाजन जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि सुबह ब्रश करने के बावजूद गिलोय की दातुन जरूर करनी चाहिए।

ब्रश 🪥 या दातून 🌿 – कौन सा बेहतर है?दाँतों की सफाई के लिए दोनों तरीके अच्छे हैं, लेकिन सही तरीका चुनना जरूरी है।ब्रश के फायदे।गहरी सफाई करता है।ब्रश दाँतों के कोनों और बीच की जगह को अच्छी तरह साफ करता है।

कैविटी से बचाव 🦠टूथपेस्ट में फ्लोराइड होता है, जो दाँतों को सड़न से बचाता है। आसान और सुरक्षित।सॉफ्ट ब्रश सही तरीके से उपयोग करने पर मसूड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाता। दातून के फायदे 🌿

प्राकृतिक और केमिकल-फ्रीदातून में प्राकृतिक औषधीय गुण होते हैं। मसूड़ों को मजबूत करता है।यह मसूड़ों की मालिश करके उन्हें मजबूत बनाता है। मुंह की बदबू दूर करता है‌।दातून मुंह को ताजा और साफ रखता है।गिलोय (Giloy) अपने एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण दांतों और मसूड़ों के लिए बेहद फायदेमंद है। यह दांतों के दर्द, मसूड़ों की सूजन, पायरिया, कैविटी और मुंह की बदबू को कम करने में मदद करती है। गिलोय की डंठल या पत्तों का उपयोग दांतों की सफाई के लिए किया जा सकता है।

दांतों के लिए गिलोय के मुख्य फायदे:

मसूड़ों की सूजन कम करना: गिलोय के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मसूड़ों में सूजन और दर्द को कम करते हैं।

कीटाणुओं का नाश: यह मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया को मारकर दांतों की सड़न और कैविटी (cavity) से बचाव करती है।

पायरिया और बदबू: गिलोय के चूर्ण या इसके डंठल से दांतून करने से पायरिया में राहत मिलती है और सांसों की बदबू दूर होती है।

दांतों को मजबूती: इसमें मौजूद कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व दांतों को मजबूत बनाने में सहायता करते हैं।

उपयोग करने के तरीके:

दांतून: गिलोय की ताजी डंठल (डंडी) से दांतों को रगड़ने से दांत साफ़ और स्वस्थ रहते हैं।

काढ़ा या कुल्ला: गिलोय के पत्तों या डंठल को पानी में उबालकर उस पानी से कुल्ला (Gargle) करने से मसूड़ों की समस्या में आराम मिलता है।

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