*क्या हार्ट फेलियर में 1 लीटर पानी ही काफी है? कार्डियक कैशेक्सिया और डाइट मैनेजमेंट डा अर्चिता महाजन*

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर, मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन, होम्योपैथिक फार्मासिस्ट लाइफ़ साइंस ,बोटेनिस्ट, हेल्थ इंस्पेक्टर एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित एवं लेफ्टिनेंट गवर्नर ऑफ यूनियन टेरिटरी लेह लद्दाख द्वारा सम्मानित ने बताया
कार्डियक कैशेक्सिया (Cardiac Cachexia) गंभीर या क्रोनिक हार्ट फेलियर (Heart Failure) की एक जटिल और गंभीर स्थिति है। इसमें हृदय की कार्यप्रणाली कमजोर होने के कारण शरीर में गंभीर रूप से मांसपेशियों और वसा का नुकसान (muscle wasting and weight loss) होने लगता है। इस स्थिति में मरीज के शरीर का वजन अनजाने में तेजी से कम होता है, जिससे कमजोरी और थकान काफी बढ़ जाती है।
हार्ट फेलियर में शरीर में तरल पदार्थ जमा (fluid retention) होने की समस्या रहती है, जबकि कैशेक्सिया में उच्च-कैलोरी और उच्च-प्रोटीन पोषण की आवश्यकता होती है। इसलिए इस स्थिति का आहार प्रबंधन (dietary management) बेहद संतुलित होना चाहिए।
*1 लीटर की सख्त सीमा कब?*
1 लीटर की सीमा कब और क्यों तय की जाती है?
जब दिल की पंपिंग क्षमता बहुत कम हो जाती है, तो गुर्दे (Kidneys) शरीर से पानी को बाहर नहीं निकाल पाते। इससे पानी फेफड़ों और पैरों में जमा होने लगता है। डॉक्टर 1 लीटर (1000 ml) की सख्त सीमा तब लगाते हैं जब:
*एडवांस या गंभीर हार्ट फेलियर हो:* दिल पर बिल्कुल दबाव न पड़े।
शरीर में भारी सूजन हो: फेफड़ों में पानी भरने से सांस फूल रही हो।
हाइपोनेट्रेमिया (Hyponatremia): खून में सोडियम का स्तर बहुत कम हो गया हो।
*क्या 1 लीटर पानी काफी होता है?* (प्यास प्रबंधन)
शारीरिक रूप से 1 लीटर तरल पदार्थ मरीज को डिहाइड्रेशन (Dehydration) से बचाने के लिए काफी होता है, लेकिन मरीज को प्यास लगने की समस्या हो सकती है।
इसे मैनेज करने के तरीके:
1 लीटर बोतल नियम: सुबह 1 लीटर की एक अलग बोतल भरकर रख लें। दिनभर जो भी पानी या तरल (चाय, दूध, सूप) लें, उसी बोतल में से लें या उतनी मात्रा निकाल दें।
बरफ के छोटे टुकड़े: पानी पीने के बजाय बर्फ का एक छोटा टुकड़ा मुंह में रखकर चूसें (बर्फ पिघलने पर पानी की मात्रा कम और ठंडक ज्यादा मिलती है)।
कुल्ला करें: मुंह सूखने पर ठंडे पानी से कुल्ला करके पानी बाहर थूक दें।
इस 1 लीटर में केवल पानी ही नहीं, बल्कि चाय, सूप, दूध और दाल का पानी भी गिना जाता है।
*मॉनिटरिंग:* रोज सुबह शौच के बाद अपना वजन मापें। यदि 2-3 दिनों में वजन 1 से 2 किलोग्राम तेजी से बढ़ता है, तो यह शरीर में पानी जमा होने का संकेत हो सकता है।
*सोडियम (नमक)* का सीमित सेवन
हार्ट फेलियर के मरीजों में अत्यधिक सोडियम से शरीर में पानी जमने (edema) और सांस फूलने की समस्या बढ़ जाती है।
दैनिक सीमा: प्रतिदिन 1.5 से 2 ग्राम (1,500 – 2,000 mg) सोडियम या लगभग आधा छोटा चम्मच नमक ही लें।
परहेज करें: प्रिजर्व्ड या डिब्बाबंद भोजन, नमकीन, पापड़, अचार, बेकिंग सोडा, सॉस और प्रसंस्कृत (processed) खाद्य पदार्थों से बचें।
विकल्प: भोजन में स्वाद बढ़ाने के लिए नमक के बजाय नींबू का रस, सिरका, भुना जीरा, हरा धनिया, और अन्य घरेलू मसालों का प्रयोग करें।
