*गर्मी है, ठीक है परंतु फिर भी सिटिंग जाब में है तो ज़रूरत से ज्यादा पानी न पिए, डॉ अर्चिता महाजन*

1 जुलाई/ सुनील कुमार
डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता थी द्वारा सम्मानित ने बताया कि किडनी पर दबाव: जरूरत से ज्यादा पानी पीने से किडनी को उसे बाहर निकालने के लिए अतिरिक्त काम करना पड़ता है, जिससे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है।इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन: शरीर के महत्वपूर्ण खनिज (जैसे सोडियम और पोटेशियम) पानी के साथ घुलकर पेशाब के रास्ते बाहर बह जाते हैं। इससे मांसपेशियों में ऐंठन और कमजोरी हो जाती है।ब्रेन स्वेलिंग (मस्तिष्क में सूजन): खून में सोडियम का स्तर कम होने से अतिरिक्त पानी कोशिकाओं के अंदर जाने लगता है। मस्तिष्क की कोशिकाओं के सूजने से भ्रम, दौरे पड़ना, कोमा या मृत्यु तक का खतरा रहता है।पाचन क्रिया में दिक्कत: अत्यधिक पानी पीने से पेट फूलने, उल्टी और जी मिचलाने की समस्या हो सकती है।नींद में बाधा: रात में बहुत अधिक पानी पीने से बार-बार यूरिन के लिए उठना पड़ता है, जिससे नींद पूरी नहीं होती और थकान बनी रहती है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय: पानी पीने का कोई तय नियम नहीं है। हमेशा अपनी प्यास के अनुसार पानी पिएं, जबरदस्ती अलार्म लगाकर बहुत ज्यादा पानी पीने से बचें।आवश्यकता से अधिक पानी पीने से शरीर में ‘ओवरहाइड्रेशन’ (overhydration) या जल विषाक्तता की स्थिति पैदा हो जाती है। इससे खून में सोडियम का स्तर कम हो जाता है (हाइपोनेट्रेमिया), जो मस्तिष्क में सूजन, गंभीर दौरे, कोमा और जानलेवा स्थिति का कारण बन सकता है।ज्यादा पानी पीने के प्रमुख नुकसान इस प्रकार हैं:किडनी पर दबाव: जरूरत से ज्यादा पानी पीने से गुर्दों (kidneys) को अतिरिक्त तरल पदार्थ को छानने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है, जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर बुरा असर पड़ता है।इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन: शरीर में मौजूद जरूरी नमक और इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे सोडियम और पोटैशियम) पानी के साथ घुलकर पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाते हैं।मस्तिष्क की कोशिकाएं फूलना: रक्त में सोडियम की कमी के कारण दिमाग की कोशिकाओं में पानी भर जाता है और वे सूजने लगती हैं, जिससे सिरदर्द, भ्रम और थकान की समस्या होती है।मांसपेशियों में ऐंठन: इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर बिगड़ने से मांसपेशियों में कमजोरी, मरोड़ और ऐंठन की शिकायत हो सकती है।उल्टी और जी मिचलाना: जब किडनी अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में असमर्थ होती है, तो यह पेट में जमा होने लगता है, जिससे जी मिचलाना, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
