टाइप 2 डायबिटीज लिवर फाइब्रोसिस के लिए खतरा है डॉ अर्चिता महाजन* 

*टाइप 2 डायबिटीज लिवर फाइब्रोसिस के लिए खतरा है डॉ अर्चिता महाजन*

जालंधर/सुनील कुमार

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि टाइप 2 डायबिटीज और लिवर फाइब्रोसिस का गहरा संबंध है, जहाँ उच्च रक्त शर्करा (sugar) के कारण लिवर में चर्बी (Fatty Liver) जमा होती है और धीरे-धीरे लिवर सख्त (Fibrosis) होने लगता है। भारत में 4 में से 1 डायबिटीज रोगी को यह गंभीर समस्या है। समय पर पहचान न होने पर यह सिरोसिस या लिवर फेलियर में बदल सकता है, इसलिए साल में एक बार लिवर की जांच (Fibroscan) जरूरी है।

डायबिटीज और लिवर फाइब्रोसिस के बीच संबंध।बढ़ता खतरा: टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में बहुत अधिक होता है। एक अध्ययन के अनुसार, 26% डायबिटीज रोगियों में फाइब्रोसिस के लक्षण पाए गए।कारण (इंसुलिन रेजिस्टेंस): जब शरीर इंसुलिन का उपयोग ठीक से नहीं कर पाता (इंसुलिन रेजिस्टेंस), तो लिवर में फैट जमा होने लगता है, जिससे सूजन (inflammation) होती है और यह फाइब्रोसिस का कारण बनता है।चौथा प्रमुख कॉम्प्लिकेशन: हालिया स्टडीज के अनुसार, भारत में टाइप-2 डायबिटीज वाले हर 4 में से 1 मरीज लिवर फाइब्रोसिस का शिकार है। अब इसे डायबिटीज का चौथा प्रमुख कॉम्प्लिकेशन माना जा रहा है।

साइलेंट अटैक: लिवर फाइब्रोसिस के शुरुआती चरणों में अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखते, जिससे यह चुपचाप लिवर को नुकसान पहुँचाता रहता है।

सिरोसिस का खतरा: अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो फाइब्रोसिस बढ़कर लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) का रूप ले सकता है, जो एक गंभीर स्थिति है। खतरनाक संयोजन: अगर टाइप-2 डायबिटीज के साथ मोटापा या उच्च कोलेस्ट्रॉल है, तो फाइब्रोसिस का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

लिवर फाइब्रोसिस के लक्षण

फाइब्रोसिस के शुरुआती चरणों में कोई लक्षण नहीं दिखते। जब स्थिति गंभीर होती है (सिरोसिस), तब ये लक्षण दिख सकते हैं:

थकान और कमजोरी

पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में हल्का दर्द।वजन कम होना।त्वचा या आंखों का पीला पड़ना (पीलिया)।पेट में पानी भरना ।बचाव और प्रबंधन

नियमित जांच: साल में कम से कम एक बार [फाइब्रोस्कैन (Fibroscan)] या लिवर एंजाइम टेस्ट जरूर करवाएं।

ब्लड शुगर नियंत्रण: शुगर लेवल को नियंत्रित रखकर लिवर डैमेज को रोका जा सकता है।स्वस्थ जीवनशैली: वजन कम करना, पौष्टिक आहार लेना और नियमित व्यायाम करना फैटी लिवर और फाइब्रोसिस को ठीक करने में सहायक है।शराब से परहेज: शराब का सेवन लिवर की स्थिति को बहुत तेजी से खराब कर सकता है।वसायुक्त यकृत रोग और मधुमेह।यदि आप टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित हैं, तो आपको फैटी लिवर रोग होने का खतरा अधिक होता है। यह मधुमेह की जटिलताओं में से एक है। ये दोनों स्थितियाँ आपके चयापचय से जुड़ी हैं। चयापचय वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा आपका शरीर ऊर्जा का भंडारण और उपयोग करता है।अपने मधुमेह विशेषज्ञ से लिवर रोग के जोखिम के बारे में बात करना एक अच्छा विचार है। यह एक मिथक है कि लिवर रोग केवल अधिक शराब पीने वालों को ही होता है; यह स्थिति किसी को भी हो सकती है।वसायुक्त यकृत रोग का पूरा नाम मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज या MASLD है। हाल तक इसे नॉन-अल्कोहल रिलेटेड फैटी लिवर डिजीज या NAFLD कहा जाता था। आपको इनमें से कोई भी नाम सुनने को मिल सकता है।

वसायुक्त यकृत रोग यकृत में अत्यधिक वसा जमा होने के कारण होता है। इससे सूजन हो सकती है, जो यकृत को नुकसान पहुंचा सकती है। समय के साथ, यकृत की क्षति से फाइब्रोसिस नामक निशान बन सकते हैं। यकृत में गंभीर निशान होने को सिरोसिस कहा जाता है।सिरोसिस के साथ लोग कई साल तक जीवित रह सकते हैं, लेकिन अगर लिवर में लगातार खरोंचें बढ़ती रहें तो यह ठीक से काम करना बंद कर सकता है। लिवर आपके शरीर की फैक्ट्री की तरह है और कई महत्वपूर्ण काम करता है जो आपको जीवित और स्वस्थ रखते हैं। इसलिए, अगर यह खराब होने लगे तो यह जल्दी ही गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।

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