अगर परीक्षा में सिलेबस से बाहर आए सवाल, तो मिलेगा पूरा नंबर

रोज़ाना रिपोर्टर न्यूज

परीक्षा का समय हर छात्र के लिए तनाव और उम्मीद का मिला जुला दौर होता है। महीनों की तैयारी, कोचिंग, अभ्यास और रातों की मेहनत इस भरोसे पर टिकती है कि सवाल उसी पाठ्यक्रम से आएंगे जो पढ़ाया गया है। लेकिन जब परीक्षा कक्ष में बैठा छात्र ऐसा प्रश्न देखता है जो उसने कभी पढ़ा ही नहीं, तो घबराहट होना स्वाभाविक है। इसी तरह की स्थिति इस साल उच्च माध्यमिक परीक्षा में सामने आई, जब गणित के प्रश्नपत्र में कुछ सवाल तय पाठ्यक्रम से बाहर पाए गए। अब इस मामले पर बोर्ड ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए विद्यार्थियों के पक्ष में बड़ा निर्णय लिया है।पश्चिम बंगाल उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद ने स्पष्ट किया है कि गणित प्रश्नपत्र के तीन प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर थे। इस गलती की जिम्मेदारी बोर्ड ने खुद ली है और घोषणा की है कि जिन छात्रों ने उन प्रश्नों को हल करने की कोशिश की है, उन्हें पूरे अंक दिए जाएंगे, चाहे उनका उत्तर सही हो या नहीं।

जानकारी के अनुसार प्रश्न संख्या 2B, 11B और 11C पाठ्यक्रम से बाहर थे। इन प्रश्नों के अंक क्रमशः दो, चार और चार थे। इस तरह कुल मिलाकर दस अंकों का हिस्सा प्रभावित हुआ। बोर्ड ने विषय विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद यह निर्णय लिया कि छात्रों के साथ अन्याय न हो, इसलिए प्रयास करने वाले सभी विद्यार्थियों को इन दस अंकों का पूरा लाभ दिया जाएगा।

हालांकि, बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगी जिन्होंने इन प्रश्नों को हल करने का प्रयास किया। जिन्होंने सवाल बिल्कुल नहीं लिखा, उन्हें अंक नहीं दिए जाएंगे। बोर्ड का तर्क है कि प्रयास करने वाले छात्र ने परीक्षा में ईमानदारी से जवाब देने की कोशिश की, इसलिए उसे नुकसान नहीं होना चाहिए।

इस वर्ष उच्च माध्यमिक परीक्षा में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। पहले दिन ही लगभग 7 लाख 10 हजार से अधिक छात्र विभिन्न विषयों की परीक्षा में शामिल हुए। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य में इस परीक्षा को लेकर कितनी गंभीरता और प्रतिस्पर्धा है। पश्चिम बंगाल भर में करीब 2100 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां ऑफलाइन माध्यम से परीक्षा आयोजित की जा रही है। हर दिन एक ही पाली में सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजकर 15 मिनट तक परीक्षा ली जा रही है, ताकि प्रक्रिया व्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हो सके।

इस बार परीक्षा व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव लागू किया गया है। अब पाठ्यक्रम को चार सेमेस्टर में बांटा गया है। कक्षा 12 में तीसरे और चौथे सेमेस्टर की पढ़ाई और परीक्षा शामिल होती है। हर सेमेस्टर 40 अंकों का होता है और अधिकांश विषयों का कुल मूल्यांकन 100 अंकों का रखा गया है, जिसमें लिखित परीक्षा के साथ प्रायोगिक या प्रोजेक्ट कार्य भी शामिल है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रणाली का उद्देश्य छात्रों पर एक साथ पूरे साल का बोझ कम करना और पढ़ाई को चरणबद्ध बनाना है। इससे विद्यार्थियों को विषयों को बेहतर ढंग से समझने का समय मिलता है और मूल्यांकन अधिक संतुलित हो पाता है।

गणित जैसे विषय में सिलेबस से बाहर प्रश्न आना छात्रों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन सकता था, क्योंकि यह विषय पहले से ही कई विद्यार्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में बोर्ड का यह फैसला उनके लिए राहत लेकर आया है। कई छात्रों और अभिभावकों ने इसे न्यायपूर्ण कदम बताया है, क्योंकि गलती परीक्षा देने वालों की नहीं थी।

शिक्षकों का कहना है कि इस घटना ने प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी ध्यान खींचा है। आगे ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए जांच और सावधानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि छात्रों का भरोसा बना रहे।

उच्च माध्यमिक परीक्षाएं 12 फरवरी से शुरू हुई थीं और 27 फरवरी तक चलेंगी। इस दौरान लाखों विद्यार्थी अपने भविष्य की दिशा तय करने वाली इस परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। बोर्ड का कहना है कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। यह घटना शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और छात्र हित को प्राथमिकता देने का उदाहरण भी बन गई है, जहां गलती स्वीकार कर सुधारात्मक निर्णय लिया गया।

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