Delhi/rozana reporter

परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के ढेर, ढुलाई और महीनों तक चलने वाली जांच प्रक्रिया अब धीरे धीरे इतिहास बनने जा रही है। सीबीएसई के बाद Punjab में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब शिक्षक छात्रों की कॉपियां हाथ से नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर जांचेंगे। इससे न केवल समय बचेगा बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित भी होगी।राज्य में ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी OSM सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिसके तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा। इसके बाद परीक्षक इन्हें ऑनलाइन लॉगिन के जरिए देखेंगे और स्क्रीन पर ही अंक देंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य मूल्यांकन को तेज, सटीक और तकनीक आधारित बनाना है।शिक्षा मंत्री ने बताया क्यों जरूरी था बदलाव
राज्य के शिक्षा मंत्री Harjot Singh Bains ने कहा कि यह कदम पंजाब को उन शुरुआती राज्यों में शामिल करेगा जहां उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल तरीके से होगा। उनका कहना है कि इससे कॉपियों के खोने, गड़बड़ी या देरी जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी और रिजल्ट समय पर जारी करना आसान होगा।
यह व्यवस्था सीधे लागू नहीं की जा रही, बल्कि इसका परीक्षण पहले ही किया जा चुका है। सितंबर 2025 की सप्लीमेंट्री परीक्षाओं में लगभग 23 हजार उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया गया था। इस ट्रायल के सफल रहने के बाद अब इसे बड़े स्तर पर लागू करने का फैसला लिया गया है।
नई उत्तर पुस्तिकाओं के हर पेज पर एक यूनिक QR कोड दिया जाएगा। यह कोड कॉपी की पहचान को सुरक्षित बनाएगा। परीक्षा के बाद कॉपियों को सुरक्षित केंद्रों पर स्कैन किया जाएगा और फिर एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड पर अपलोड किया जाएगा। परीक्षक तय मानक के अनुसार ऑनलाइन जांच करेंगे, अंक सीधे सिस्टम में दर्ज होंगे और पूरी प्रक्रिया रियल टाइम में मॉनिटर की जा सकेगी। इससे मानवीय गलती की संभावना भी कम होगी।
इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को Punjab School Education Board द्वारा लागू किया जाएगा। बोर्ड पहले चरण में इसे 2026 की मैट्रिक परीक्षा के एक विषय में शुरू करेगा और बाद में धीरे धीरे सभी विषयों में विस्तार किया जाएगा।
इससे पहले Central Board of Secondary Education भी डिजिटल मार्किंग सिस्टम की शुरुआत कर चुका है। अब पंजाब का यह कदम राज्य बोर्ड स्तर पर परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से अपग्रेड करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई व्यवस्था से कॉपियों की जांच में लगने वाला लंबा समय घटेगा, रिजल्ट जल्दी आएंगे और मूल्यांकन ज्यादा पारदर्शी होगा। शिक्षकों को भी अब भारी मात्रा में उत्तर पुस्तिकाएं संभालने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उनका काम आसान और व्यवस्थित होगा।
