चंडीगढ़ 8 जुलाई /रोजाना रिपोर्टर

जैसे-जैसे चुनाव 2027 नज़दीक आ रहे हैं उधर कांग्रेस पार्टी अंदरूनी गुटबाजी से जूझती नजर आ रही है। पार्टी के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान ने हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। मौजूदा हालात 2021 की उस स्थिति की याद दिला रहे हैं।
नवजोत सिंह सिद्धू और तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच टकराव ने कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाया था।
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का बदला हुआ अंदाज और उनके हालिया राजनीतिक तेवर नवजोत सिंह सिद्धू की याद दिला रहे हैं.कांग्रेस नेतृत्व ने आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की थी। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया जबकि चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया गया। हालांकि, माना जा रहा है कि चन्नी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी चाहते थे और फैसला उनके पक्ष में नहीं जाने के बाद उनकी नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।
हाल के दिनों में चन्नी अपने समर्थक विधायकों, पूर्व विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं।
मोरिंडा स्थित उनके आवास पर हुई बैठकों को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इन बैठकों के जरिए पार्टी नेतृत्व को राजनीतिक संदेश देने की कोशिश देखी जा रही है। दूसरी ओर, राजा वड़िंग लगातार विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के साथ संपर्क मजबूत करने में जुटे हैं।चन्नी समर्थकों का तर्क है कि पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री होने और उनके जनाधार को देखते हुए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए था या फिर 2027 चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाना चाहिए। वहीं, वड़िंग समर्थक उनके नेतृत्व में 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन का हवाला देते हुए संगठन में बदलाव की जरूरत नहीं मानते। यदि यह खींचतान लंबी चली तो कांग्रेस को चुनावी रणनीति पर असर पड़ सकता है।2021 में भी नेतृत्व विवाद और गुटबाजी के कारण पार्टी कमजोर हुई थी। कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच लंबे समय तक चले टकराव के बाद हाईकमान को हस्तक्षेप करना पड़ा था, लेकिन उसका असर 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के रूप में सामने आया। अब इस बार भी चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखे। आम आदमी पार्टी सत्ता में है, जबकि भाजपा और शिरोमणि अकाली दल भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में यदि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर विवाद और गुटबाजी जारी रहती है, तो विपक्ष के तौर पर उसकी स्थिति कमजोर हो सकती है लेकिन चुनाव जीतने के लिए आपसी सांझेदारी बहुत जरूरी है।
